रिक्शे चालक का बेटा बना आईएएस | कभी लोग उड़ाते थे मजाक

रिक्शे चालक का बेटा बना आईएएस |

कहते हैं अगर आपमें कुछ करने का जूनून है और आप लगन से कुछ करते हैं तो आप जरूर सफल होते हैं। एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स ने कहा था जो लोग ये सोच सकते हैं की वो दुनिया बदल सकते हैं , वो लोग सचमुच दुनिया बदल सकते हैं अपने ज्ञान से और अपनी लगन से। ऐसा ही कुछ किया है गोविन्द जायसवाल ने। जिनका कभी लोग मजाक उड़ाया करते थे और उन्होंने दिल में यह सोच लिया था की एक दिन कुछ ऐसा करना है जिससे वो खुद को साबित कर सकें।

बचपन से ही गोविन्द यह सुनकर बड़े हुए थे की एक रिक्शे वाले का बेटाआईएएस नहीं बन सकता। और यही बात उन्हें दिल में चुभ गयी। क्योंकि उनके पिता का संघर्ष सिर्फ वो ही समझ सकते थे। उन्हें लोगो द्वारा उनके पिता का मजाक उड़ाना बहुत खलता था। इसलिए उन्होंने सोच लिया था की वह अपने परिवार के लिए कुछ ऐसा करेंगे की लोग उन्हें सम्मान से देखें।

एक कमरे के घर में पूरा परिवार रहता था और उन्हें सिविल सर्विसेज की तयारी करने के लिए रात रात भर जाग कर पढाई करनी पड़ती थी। वहीँ उनके घरवालों की जिद्द थी की वो आईएएस बने और उनके परिवार ने इसके लिए उनका पूरा साथ दिया।

गोविन्द की पढाई के लिए परिवार ने अपना पुस्तैनी मकान बेच दिया परन्तु इससे भी नहीं हुआ तो गोविन्द खुद बच्चों को टूशन देने लगे। लेकिन उन्होंने अपने मन में ठान लिया था की वो एक दिन जरूर आईएएस बन कर दिखाएंगे। और वर्ष २००६ में अपने पहले ही प्रयास में गोविन्द ने आईएएस परीक्षा में ४८ रैंक प्राप्त किया और हिंदी माध्यम में परीक्षा देने की श्रेणी में वो टॉपर भी रहे।

अब गोविन्द दिल्ली ईस्ट एरिया के जिला मजिस्ट्रेट हैं। वो बताते हैं की अगर उनके जीवन में तकलीफें न होती तो वो शायद ये मुकाम हासिल नहीं कर पाते। क्योंकि जीवन में कठिनाइयों से ही हममें जीवन जीने की कला आती है।

गोविन्द आज के नौजवानो के लिए काफी प्रेरणा दायक हैं की किसी भी परिस्थिति हो अगर आपने मन में ठान लिया तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

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